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🪔 पितृ स्मरण

श्राद्ध — पितृ पक्ष

🙏 मेरे पितृ — श्राद्ध की तारीख़ जानिए

अपने पूर्वजों का नाम और देहांत की तारीख़ लिखिए — श्राद्ध और हर साल की पुण्यतिथि की तारीख़ यहाँ दिखेगी। यह सब सिर्फ़ आपके फ़ोन में रहता है।

तारीख़ याद नहीं? तिथि चुनें
📅 श्राद्ध की तिथियाँ

तिथियाँ अनुमानित हैं (सूर्योदय की तिथि के हिसाब से)। पक्की तारीख़ अपने पंडित जी या स्थानीय पंचांग से ज़रूर मिलाएँ।

📖 श्राद्ध क्या है?

हर साल भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक के लगभग 16 दिन पितृ पक्ष कहलाते हैं। माना जाता है कि इन दिनों हमारे पूर्वज (पितृ) धरती पर आते हैं, और हम जल, भोजन और दान से उन्हें याद करते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं।

जिस तिथि को किसी का देहांत हुआ हो (तारीख़ नहीं, हिंदू पंचांग की तिथि), पितृ पक्ष में उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है।

⭐ ख़ास तिथियाँ
  • मातृ नवमी (नवमी): माँ, दादी और सुहागिन रहते हुए जिनका देहांत हुआ हो, उन महिलाओं का श्राद्ध।
  • द्वादशी: जिन्होंने संन्यास लिया हो, उनका श्राद्ध।
  • चतुर्दशी: जिनकी मृत्यु दुर्घटना या किसी अचानक कारण से हुई हो।
  • सर्व पितृ अमावस्या: जिनकी तिथि याद न हो — उन सब पितरों का श्राद्ध इस दिन होता है। यह पितृ पक्ष का सबसे बड़ा दिन है।
🪔 श्राद्ध की आसान विधि
  1. सुबह स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। दोपहर (लगभग 11:30 से 2:30) का समय श्राद्ध के लिए अच्छा माना जाता है।
  2. तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके, हाथ में जल, काले तिल और कुशा लेकर पितरों का नाम लेते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें। साथ में बोलें — "ॐ पितृभ्यः नमः"।
  3. भोजन: खीर, पूरी, सब्ज़ी जैसा सात्त्विक भोजन बनाएँ — बिना प्याज़-लहसुन। जो पितरों को पसंद था, वह भी बना सकते हैं।
  4. पंचबलि: भोजन का थोड़ा हिस्सा गाय, कुत्ते, कौए, चींटियों और देवताओं के लिए अलग निकालें।
  5. ब्राह्मण भोजन या दान: किसी ब्राह्मण को भोजन कराएँ, या किसी ज़रूरतमंद को खाना, कपड़े या दान दें।
  6. अंत में पितरों से क्षमा माँगें और परिवार के साथ भोजन करें।

पूरी विधि और पिंडदान के लिए अपने पंडित जी की सलाह लें — हर परिवार की परंपरा थोड़ी अलग होती है।

✅ क्या करें   ❌ क्या न करें (मान्यताएँ)
  • ✅ पितरों को याद करें, उनकी अच्छी बातें बच्चों को सुनाएँ।
  • ✅ गाय, कौए और ज़रूरतमंदों को भोजन दें।
  • ✅ घर में शांति और सादगी रखें।
  • ❌ इन दिनों नए शुभ काम — जैसे गृह प्रवेश, सगाई, नई ख़रीदारी — आमतौर पर नहीं किए जाते।
  • ❌ श्राद्ध के भोजन में प्याज़, लहसुन और मांसाहार नहीं।
👴 बुज़ुर्गों के लिए सरल श्राद्ध

अगर ज़्यादा खड़े होना, उपवास या लंबी पूजा मुश्किल हो, तो कोई बात नहीं। कुर्सी पर बैठकर जल-तिल से तर्पण करें, पितरों का नाम लें और किसी भूखे को भोजन करा दें। शास्त्रों में भी कहा गया है कि श्रद्धा से किया गया छोटा कर्म भी पूरा फल देता है। दवाई समय पर लेते रहें — व्रत के नाम पर दवा न छोड़ें।

📞 ज़रूरी नंबर

🚨 आपातकाल — 112 🚑 एम्बुलेंस — 108 👴 वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन — 14567

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👤 मेरी पसंद

आपका नाम सुविचार की फ़ोटो और भेजे गए गानों पर दिखेगा। यह सब सिर्फ़ इसी फ़ोन में रहता है।